STRAIGHT FROM HEART "A WORLD OF DUSK AND DAWN"...
बुधवार, 30 नवंबर 2011
नारी
नारी
कैसे -कैसे , कैसी -कैसी
सहती है नारी हर पीर
बताता है नैनों से बहता हुआ नीर
सदियाँ गुजर गयी
सब कुछ बदल गयी
न बदली है नारी , न बदलेगी बेचारी
क्योकिं नारी खुद से ही हारी
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