शनिवार, 17 मार्च 2012

क्या है सार

क्या है सार

मुझे कोई गम नहीं न ही कोई मलाल है 
बस अदना सा सवाल करता बवाल है 
देखो तो सही, ऊपर वाले 
तेरी क्या गजब की चाल है 
खुद हजार वर्ष जी कर भी रहे यौवन की खान 
सुरा और सुंदरी का करते रहे भरपूर पान 
और हम इन्सान चार दशक पार करते ही  दिखते है लाचार 
अभावो के सागर में मुश्किल से लगाते है जीवन की नैया पार 
फिर भी संतोष नहीं दे दी बुढ़ापे की मार 
हाल -बेहाल ऊपर से बीमारियों की  भरमार 
अब तुम्ही बताओ भगवन 
ऐसे जीने का क्या है सार.









बलात्कार


बलात्कार 

बलात्कार की शिकार युवती ने
 न्याय चाहा 
बदले में एक और बलात्कार पाया 
फर्क सिर्फ इतना ही नजर आया 
पहले मजबूर थी आज मज़बूरी है 
न्याय की सीढियाँ बड़ी लम्बी है 
और उनपर चढ़ना जरुरी है.


संजोये हुए सपने को साकार करना है 
जिंदगी को एक नया आकर देना है 
बस उडान भरना है बाकि 
खुला आसमान कब से प्रतीक्षा में है साथी