बलात्कार
बलात्कार की शिकार युवती ने
न्याय चाहा
बदले में एक और बलात्कार पाया
फर्क सिर्फ इतना ही नजर आया
पहले मजबूर थी आज मज़बूरी है
न्याय की सीढियाँ बड़ी लम्बी है
और उनपर चढ़ना जरुरी है.
संजोये हुए सपने को साकार करना है
जिंदगी को एक नया आकर देना है
बस उडान भरना है बाकि
खुला आसमान कब से प्रतीक्षा में है साथी
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