मंगलवार, 30 अगस्त 2011

बांधता है गति को,

  बांधता है गति  को

जब कोई  बांधता है गति  को 
पर करता है अति को
देता हैजन्म हिंसक प्रवति को,
टूटते है बांध ,
घुमड़ते है जोरो से आंधी तूफान 
मच जाता है हाहाकार
लग जाता  है लाशो का अम्बार,
 फिर 
ग्रहण के बंधन होते है असफल 
 सूर्य ,चन्द्र की रौशनी दुगुनी होती है प्रतिपल 
स्वरमयी  नदियाँ बहती है कलकल 
छोडती हुयी पीछे बदबूदार ढेरों  को
बाँधने के लिए बनाये गए घेरो को 
 और 
तब पाती है असीम तृप्ति कों
वेदनाओं की गहनता से मुक्ति कों |





बुधवार, 24 अगस्त 2011

Aajadi ki sakshi .

आजादी की साक्षी 



वो मुझे डराता है ,कंकरीली सड़क दिखाता है,
बताता है कि सत्य का साथ देने वाला गुमनाम कहलाता है
 मे भी  हंसके समझाता हूँ 
पन्नो को  पलटाता  हूँ

अनगिनत क्रांतिवीरो के चित्रों कों शीश नवाता हूँ 
बताता हूँ   की अंधकार के वक्ष स्थल पर  छोटा दीप काफी है 
उसी की रौशनी हमारी आजादी  की  साक्षी है |

Mother Teresa

      नहीं तेरा कोई सानी ..........

तपते   रेगिस्तान में एक बूंद पानी की 
सूखे खलिहान में छाँव हरियाली की 
मुरझाते जीवन में सांसे खुशिहाली की

बरसाती थी नेह , ब नके मेह
भर्ती थी उर्जा का वेग 
ऐसा था त्याग और तपस्या का
अद्भुत समावेश 

क्या  कहूँ  उनके बारे कुछ 
सारी  उपमाएं  जि नके सामने है तुच्छ 


सच तो ये है 
तू आज भी  जीवित है बन अद्भुत कहानी 
मदर टेरेसा नहीं तेरा कोई सानी
नहीं तेरा कोई सानी |