शनिवार, 17 मार्च 2012

क्या है सार

क्या है सार

मुझे कोई गम नहीं न ही कोई मलाल है 
बस अदना सा सवाल करता बवाल है 
देखो तो सही, ऊपर वाले 
तेरी क्या गजब की चाल है 
खुद हजार वर्ष जी कर भी रहे यौवन की खान 
सुरा और सुंदरी का करते रहे भरपूर पान 
और हम इन्सान चार दशक पार करते ही  दिखते है लाचार 
अभावो के सागर में मुश्किल से लगाते है जीवन की नैया पार 
फिर भी संतोष नहीं दे दी बुढ़ापे की मार 
हाल -बेहाल ऊपर से बीमारियों की  भरमार 
अब तुम्ही बताओ भगवन 
ऐसे जीने का क्या है सार.









बलात्कार


बलात्कार 

बलात्कार की शिकार युवती ने
 न्याय चाहा 
बदले में एक और बलात्कार पाया 
फर्क सिर्फ इतना ही नजर आया 
पहले मजबूर थी आज मज़बूरी है 
न्याय की सीढियाँ बड़ी लम्बी है 
और उनपर चढ़ना जरुरी है.


संजोये हुए सपने को साकार करना है 
जिंदगी को एक नया आकर देना है 
बस उडान भरना है बाकि 
खुला आसमान कब से प्रतीक्षा में है साथी 

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

आने वाले नए साल से अपने दिल के   दर्द को बयां करती  हुयी चंद  महीनों में मरने वाली कैंसर पीड़ित महिला की व्यथा  

 तुझे तो आना है बार-बार 

ऐ नए साल तू आयेगा  इठलायेगा इतराएगा 
मदमस्त खुश्बू से जग को नहलाएगा 
और मै
नहीं देख पाऊँगी  तेरी चमक,तेरी  सादगी 
मै ठहरी अभागी 
चंद सांसे है बाकि .


 सुन मुझे देना है तुझे जिम्मेदारियों का भार 
जो अबतक था मेरे जीवन  का आधार 

कल को
 मै तो रहूंगी नहीं किन्तु तुझे तो आना है बार -बार 

देख मेरी बेटी बड़ी भोली है ,
इसकी तो नहीं उठी अभी डोली है 
खुशियों की उम्र , सब से   बेफिक्र 
रखना तू इसका ख्याल , 
जिंदगी   में इसके  रहे न  कोई मलाल .

कल को
 मै तो  रहूंगी नहीं किन्तु तुझे तो आना है बार-बार 

मेरा बेटा बड़ा चंचल है ,हरपल रहती इसके मन में बड़ी हलचल है,
ये ठहरा नादान,भले -बुरे की इसे कहा पहचान  
इसे लेना सम्हाल ,चंद खुशियाँ इसकी झोली में देना तू डाल 
न महसूस हो इसे कभी मेरी कमी ,अभी तो इसकी उम्र बड़ी लम्बी पड़ी .

कल को 
मै तो रहूंगी नहीं किन्तु तुझे तो आना है बार-बार 

मेरे पति हो जायेंगे अनाथ 
सर पर नहीं इनके माँ बाप का भी हाथ 
तब तू देना इनका साथ 
नहीं सह पाएंगे ये जुदाई का आघात 
कल को 
मै तो रहूंगी नहीं किन्तु तुझे तो आना है बार-बार 

सहसा छलछलाई आंखे जिनमे समायी थी आहें 
धीरे से डोली ,मन ही मन बोली 
काश मुझे मिल जाती चन्द सांसे उधार 
   जी भर  करती तेरा सत्कार 
नहीं देती कभी जिम्मेदारी का इतना बड़ा भार
इतना बड़ा भार .

बुधवार, 30 नवंबर 2011

नारी

 नारी 
कैसे -कैसे , कैसी -कैसी
 सहती है नारी हर पीर 
बताता है नैनों से बहता हुआ नीर 
सदियाँ गुजर गयी 
सब कुछ बदल गयी 
न बदली है नारी , न बदलेगी बेचारी 
क्योकिं नारी खुद से ही हारी 

मंगलवार, 30 अगस्त 2011

बांधता है गति को,

  बांधता है गति  को

जब कोई  बांधता है गति  को 
पर करता है अति को
देता हैजन्म हिंसक प्रवति को,
टूटते है बांध ,
घुमड़ते है जोरो से आंधी तूफान 
मच जाता है हाहाकार
लग जाता  है लाशो का अम्बार,
 फिर 
ग्रहण के बंधन होते है असफल 
 सूर्य ,चन्द्र की रौशनी दुगुनी होती है प्रतिपल 
स्वरमयी  नदियाँ बहती है कलकल 
छोडती हुयी पीछे बदबूदार ढेरों  को
बाँधने के लिए बनाये गए घेरो को 
 और 
तब पाती है असीम तृप्ति कों
वेदनाओं की गहनता से मुक्ति कों |





बुधवार, 24 अगस्त 2011

Aajadi ki sakshi .

आजादी की साक्षी 



वो मुझे डराता है ,कंकरीली सड़क दिखाता है,
बताता है कि सत्य का साथ देने वाला गुमनाम कहलाता है
 मे भी  हंसके समझाता हूँ 
पन्नो को  पलटाता  हूँ

अनगिनत क्रांतिवीरो के चित्रों कों शीश नवाता हूँ 
बताता हूँ   की अंधकार के वक्ष स्थल पर  छोटा दीप काफी है 
उसी की रौशनी हमारी आजादी  की  साक्षी है |

Mother Teresa

      नहीं तेरा कोई सानी ..........

तपते   रेगिस्तान में एक बूंद पानी की 
सूखे खलिहान में छाँव हरियाली की 
मुरझाते जीवन में सांसे खुशिहाली की

बरसाती थी नेह , ब नके मेह
भर्ती थी उर्जा का वेग 
ऐसा था त्याग और तपस्या का
अद्भुत समावेश 

क्या  कहूँ  उनके बारे कुछ 
सारी  उपमाएं  जि नके सामने है तुच्छ 


सच तो ये है 
तू आज भी  जीवित है बन अद्भुत कहानी 
मदर टेरेसा नहीं तेरा कोई सानी
नहीं तेरा कोई सानी |