हे परम शक्ति
हम तुम्हे खुश नहीं कर सकते
क्योकि तुम्हारी जीभ पर खून लगा है
निर्दोशो का खून .
क्या माँ की कोख से पैदा होने वाला मेमना
इतना बड़ा हो गया की वह गुनाह कर सके .
मौत के भय से अपनी जगह पर स्थिर
मेमने को घसीट कर ले जाना क्या उचित है .
टोकनी में बंद रिहाई के लिए CHHATPATATI मुर्गिया
उनकी आवाज तुम्हे सुनाई ही नहीं देती .
क्योकि तुम्हे कुछ दिखाई ही कहा देता है .
तुम आज भी रौद्र रूप धारण किये हुए हो .
हाथो में मुंडमाल लिए हुए उन राक्षसों के जिन्हें तुमने वध कर दिया
नहीं देखती हो उनके वंशजो द्वारा पृथ्वी पर फैलते हुए आतंक को
नहीं देखती हो हिंसा, बलात्कार ,मारामारी को.
कब तक यूही झूठे क्रोध की अग्नि में तपती रहोगी
जागो और करो संघार छल, कपट,दुराचार का,
अन्याय और अत्याचार का .
सिखाओ सबक, निरीह जानवरों का खून बहाने वालो को
बताओ उन्हें नहीं चाहिए तुम्हे खून
तुम ऐसे ही खुश हो सकती हो
सिर्फ और सिर्फ भक्ति से
हे परम शक्ति .