शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

COUPLET

क्षणिकाए,

१. संजोये हुए सपने बिखरते है तो बिखरने दो 
बिखरते हुए सपनो को चुभने दो ,
इनकी चुभन जब सताएगी 
तभी मंजिल करीब और करीब नजर आयेंगी . 

२.हताशाओ को मत बनाओ पथ अपना
सपनो को दो स्वतः ही जन्मना
ये सपने ही तो तेरे है बचपन से घेरे है
ऐसी क्या कमी है जो आज मुंह फेरे है .

३. पहले बेंचते थे बच्चे अब बेंचते है कोख
उदरपूर्ति के लिए ग्राहक लेते है खोज
कुछ तो मिलेगा कम तो चलेंगा ये लेते है सोच
और पलने देते है एक शारीर के अन्दर दुसरे शरीर का बोझ .

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