शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

पहचान

पहचान 
आखिर हमारी पहचान क्या है 
एक सशक्त नारी की 
जो समाज से लड़कर मुकाम पर पहुंची 
 या  प्यार के लिए मां- बाप को ठुकरा कर चली 
अपनों  की जिंदगी बनाने के लिए 
समझौतों की सीढियों 
पर  चढ़ी  
परिवार की भलाई के लिए 
गलाती गई खुद को 
ईश्वर के दरबार में झुकाती गई सर कों 
त्याग कर खुद की पहचान 
चुपचाप पीती गई अपमान 
और लगी  ढूढने  अपनी पहचान दुसरो कें चेहरों में .
 
 

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