अब और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
मै और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
सदियों से जलती आई हूँ ,अब और नहीं जलूँगी
पराधीनता के लिबास में मायूसी के वास में
तिल तिल कर नहीं मरूंगी
मै और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
शतरंज की बिसात पर झूठी मर्यादा की बात पर
बार- बार दांव पर नहीं लगुगी
मै और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
भरोसा है अपने आप पर
क़दमों की रफ्तार पर
नहीं DUBUNGI मझदार में
और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
मै जियूंगी इन्द्रधनुषी असमान में
सपनो की उड़ान में
नए- नए जहान में
मै और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
मै लडूंगी अन्याय से अत्याचार से
व्यभिचार से
किन्तु अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
मै अब और अग्नि परीक्षा नहीं दूंगी राम
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